भारत में ” राष्ट्रीय पुरुष आयोग विधेयक ” (National Commission for Men Bill, 2025) हाल ही में राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल द्वारा एक निजी विधेयक (Private Member Bill) के रूप में पेश किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है, लेकिन अभी तक यह कानून नहीं बना है और न ही भारत में कोई राष्ट्रीय पुरुष आयोग (National Men’s Commission) स्थापित किया गया है। पुरुष आयोग बिल की स्थिति और उद्देश्यविधेयक पेश किया गया: दिसंबर 2025 में, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने ऊपरी सदन में ‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग विधेयक, 2025’ पेश किया।
भूमिका : बहुत समय से कुछ पुरुष अधिकार संगठन जो की सभी गैर सरकारी संगठन (एन जी ओ) है पुरुष आयोग की मांग कर रहे है। इसके पीछे सोच यह है की पचास प्रतिशत आबादी जो की पुरुष है, सभी तरह के अपराध करते है, उन्हीका कब्ज़ा है हर संसाधन पर, वही सर्व शक्तिशाली है. पर हमारा यह कहना है की कुछ अपराधी पुरुषों के उदाहरण भर से सभी पुरुषों से मुंह मोड़ लेना जायज नहीं है?
आजकल कोई भी अखबार या न्यूज़ चैनल देख लीजिये, आपका यह भ्रम दूर हो जाएगा की अपराध सिर्फ पुरुष ही करते है. आजकल से समय में महिला अपराधियों की संख्या कम नहीं है. फिर भी यह समझना की महिलाये नीरीह प्राणी है, कोई अपराध नहीं कर सकती, कुछ गलत नहीं कर सकती ठीक नहीं है.
उद्धेश्य : National Commission for Men Bill भारत की न्याय प्रणाली में लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
यह बिल पुरुषों को झूठे मामलों, मीडिया ट्रायल और कानूनी भेदभाव से सुरक्षा देने के उद्देश्य से लाया गया है।
The National Commission for Men Bill 2025 एक ऐसा कानून प्रस्तावित करता है जो यह सुनिश्चित करेगा कि न्याय “लिंग” के नहीं, बल्कि “सत्य” के आधार पर हो।
आयोग की संरचना
National Commission for Men Bill के तहत केंद्र सरकार National Commission for Men (NCM) नाम से एक निकाय स्थापित करेगी।
| पदनाम | संख्या | नियुक्ति प्राधिकारी |
|---|---|---|
| Chairperson | 1 | राष्ट्रपति द्वारा |
| सदस्य (पुरुष) | 3 | केंद्र सरकार द्वारा |
| सदस्य (महिला) | 3 | लैंगिक संतुलन हेतु |
| Legal Advisor | 1 | मुख्य न्यायाधीश द्वारा |
मीडिया और सोशल मीडिया पर नियंत्रण :
National Commission for Men Bill मीडिया ट्रायल और झूठी खबरों पर सख्त प्रावधान लाता है।
| अपराध | सजा | जुर्माना |
|---|---|---|
| गलत रिपोर्टिंग | सार्वजनिक माफी | ₹50 लाख |
| झूठी सोशल मीडिया पोस्ट | 3 साल कैद | ₹5 लाख |
| डिजिटल मानहानि | कंटेंट हटाना 24 घंटे में | अदालत के आदेश से |
